Sri Laxmi Sahasranamam Ritual | Benefits of Sri Laxmi Sahasranamam | What is Sri Laxmi Sahasranamam
Mahalaxmi Mantra: Aum Shreem Hreem Shreem Kamale Kamalalaye Praseed Praseed Shreem Hreem Shreem Aum Mahalakshmaye Namaha.महालक्ष्मी मंत्र: ओम् श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालय प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं श्रीं महालक्ष्मीय नमः।
Laxmi Sahasranama or Sahastra nam is the 1000 names of goddess Lakshmi. Maa Lakshmi is Mother of all wealth, prosperity. Performing Goddess Lakshmi Sahasranama Homam and reciting the auspicious Sahasranama, 1008 Names of Goddess Lakshmi also called as Goddess Lakshmi Sahasranamavali, brings in every home with a gracious smiling, beauty and admirable appearance, tap door with pure auspiciousness and successful beginning, boost the supreme energy of rich wealth, a mountain of greater prosperity, undue good luck, enjoyment, material gains and life path to salvation.
Laxmi Sahastra naam in Hindi – श्री लक्ष्मी सहस्रनाम
ओं नित्यागतायै नमःओं अनन्तनित्यायै नमः
ओं नन्दिन्यै नमः
ओं जनरञ्जन्यै नमः
ओं नित्यप्रकाशिन्यै नमः
ओं स्वप्रकाशस्वरूपिण्यै नमः
ओं महालक्ष्म्यै नमः
ओं महाकाल्यै नमः
ओं महाकन्यायै नमः
ओं सरस्वत्यै नमः
ओं भोगवैभवसन्धात्र्यै नमः
ओं भक्तानुग्रहकारिण्यै नमः
ओं ईशावास्यायै नमः
ओं महामायायै नमः
ओं महादेव्यै नमः
ओं महेश्वर्यै नमः
ओं हृल्लेखायै नमः
ओं परमायै नमः
ओं शक्तये नमः
ओं मातृकाबीजरुपिण्यै नमः
२०
ओं नित्यानन्दायै नमः
ओं नित्यबोधायै नमः
ओं नादिन्यै नमः
ओं जनमोदिन्यै नमः
ओं सत्यप्रत्ययिन्यै नमः
ओं स्वप्रकाशात्मरूपिण्यै नमः
ओं त्रिपुरायै नमः
ओं भैरव्यै नमः
ओं विद्यायै नमः
ओं हंसायै नमः
ओं वागीश्वर्यै नमः
ओं शिवायै नमः
ओं वाग्देव्यै नमः
ओं महारात्र्यै नमः
ओं कालरात्र्यै नमः
ओं त्रिलोचनायै नमः
ओं भद्रकाल्यै नमः
ओं कराल्यै नमः
ओं महाकाल्यै नमः
ओं तिलोत्तमायै नमः
४०
ओं काल्यै नमः
ओं करालवक्त्रान्तायै नमः
ओं कामाक्ष्यै नमः
ओं कामदायै नमः
ओं शुभायै नमः
ओं चण्डिकायै नमः
ओं चण्डरूपेशायै नमः
ओं चामुण्डायै नमः
ओं चक्रधारिण्यै नमः
ओं त्रैलोक्यजनन्यै नमः
ओं देव्यै नमः
ओं त्रैलोक्यविजयोत्तमायै नमः
ओं सिद्धलक्ष्म्यै नमः
ओं क्रियालक्ष्म्यै नमः
ओं मोक्षलक्ष्म्यै नमः
ओं प्रसादिन्यै नमः
ओं उमायै नमः
ओं भगवत्यै नमः
ओं दुर्गायै नमः
ओं चान्द्र्यै नमः
६०
ओं दाक्षायण्यै नमः
ओं प्रत्यङ्गिरायै नमः
ओं धरायै नमः
ओं वेलायै नमः
ओं लोकमात्रे नमः
ओं हरिप्रियायै नमः
ओं पार्वत्यै नमः
ओं परमायै नमः
ओं देव्यै नमः
ओं ब्रह्मविद्याप्रदायिन्यै नमः
ओं अरूपायै नमः
ओं बहुरूपायै नमः
ओं विरूपायै नमः
ओं विश्वरूपिण्यै नमः
ओं पञ्चभूतात्मिकायै नमः
ओं परायै नमः
ओं काल्यै नमः
ओं मायै नमः
ओं पञ्चिकायै नमः
ओं वाग्म्यै नमः
८०
ओं हविःप्रत्यधिदेवतायै नमः
ओं देवमात्रे नमः
ओं सुरेशानायै नमः
ओं वेदगर्भायै नमः
ओं अम्बिकायै नमः
ओं धृत्यै नमः
ओं सङ्ख्यायै नमः
ओं जातये नमः
ओं क्रियाशक्त्यै नमः
ओं प्रकृत्यै नमः
ओं मोहिन्यै नमः
ओं मह्यै नमः
ओं यज्ञविद्यायै नमः
ओं महाविद्यायै नमः
ओं गुह्यविद्यायै नमः
ओं विभावर्यै नमः
ओं ज्योतिष्मत्यै नमः
ओं महामात्रे नमः
ओं सर्वमन्त्रफलप्रदायै नमः
ओं दारिद्र्यध्वंसिन्यै नमः
१००
ओं देव्यै नमः
ओं हृदयग्रन्थिभेदिन्यै नमः
ओं सहस्रादित्यसङ्काशायै नमः
ओं चन्द्रिकायै नमः
ओं चन्द्ररूपिण्यै नमः
ओं गायत्र्यै नमः
ओं सोमसम्भूत्यै नमः
ओं सावित्र्यै नमः
ओं प्रणवात्मिकायै नमः
ओं शाङ्कर्यै नमः
ओं वैष्णव्यै नमः
ओं ब्राह्म्यै नमः
ओं सर्वदेवनमस्कृतायै नमः
ओं सेव्यदुर्गायै नमः
ओं कुबेराक्ष्यै नमः
ओं करवीरनिवासिन्यै नमः
ओं जयायै नमः
ओं विजयायै नमः
ओं जयन्त्यै नमः
ओं अपराजितायै नमः
१२०
ओं कुब्जिकायै नमः
ओं कालिकायै नमः
ओं शास्त्र्यै नमः
ओं वीणापुस्तकधारिण्यै नमः
ओं सर्वज्ञशक्त्यै नमः
ओं श्रीशक्त्यै नमः
ओं ब्रह्मविष्णुशिवात्मिकायै नमः
ओं इडापिङ्गलिकामध्यमृणालीतन्तुरुपिण्यै नमः
ओं यज्ञेशान्यै नमः
ओं प्रथायै नमः
ओं दीक्षायै नमः
ओं दक्षिणायै नमः
ओं सर्वमोहिन्यै नमः
ओं अष्टाङ्गयोगिन्यै नमः
ओं देव्यै नमः
ओं निर्बीजध्यानगोचरायै नमः
ओं सर्वतीर्थस्थितायै नमः
ओं शुद्धायै नमः
ओं सर्वपर्वतवासिन्यै नमः
ओं वेदशास्त्रप्रभायै नमः
१४०
ओं देव्यै नमः
ओं षडङ्गादिपदक्रमायै नमः
ओं शिवायै नमः
ओं धात्र्यै नमः
ओं शुभानन्दायै नमः
ओं यज्ञकर्मस्वरूपिण्यै नमः
ओं व्रतिन्यै नमः
ओं मेनकायै नमः
ओं देव्यै नमः
ओं ब्रह्माण्यै नमः
ओं ब्रह्मचारिण्यै नमः
ओं एकाक्षरपरायै नमः
ओं तारायै नमः
ओं भवबन्धविनाशिन्यै नमः
ओं विश्वम्भरायै नमः
ओं धराधारायै नमः
ओं निराधारायै नमः
ओं अधिकस्वरायै नमः
ओं राकायै नमः
ओं कुह्वे नमः
१६०
ओं अमावास्यायै नमः
ओं पूर्णिमायै नमः
ओं अनुमत्यै नमः
ओं द्युतये नमः
ओं सिनीवाल्यै नमः
ओं शिवायै नमः
ओं अवश्यायै नमः
ओं वैश्वदेव्यै नमः
ओं पिशङ्गिलायै नमः
ओं पिप्पलायै नमः
ओं विशालाक्ष्यै नमः
ओं रक्षोघ्न्यै नमः
ओं वृष्टिकारिण्यै नमः
ओं दुष्टविद्राविण्यै नमः
ओं देव्यै नमः
ओं सर्वोपद्रवनाशिन्यै नमः
ओं शारदायै नमः
ओं शरसन्धानायै नमः
ओं सर्वशस्त्रस्वरूपिण्यै नमः
ओं युद्धमध्यस्थितायै नमः
१८०
ओं देव्यै नमः
ओं सर्वभूतप्रभञ्जन्यै नमः
ओं अयुद्धायै नमः
ओं युद्धरूपायै नमः
ओं शान्तायै नमः
ओं शान्तिस्वरूपिण्यै नमः
ओं गङ्गायै नमः
ओं सरस्वतीवेणीयमुनानर्मदापगायै नमः
ओं समुद्रवसनावासायै नमः
ओं ब्रह्माण्डश्रेणिमेखलायै नमः
ओं पञ्चवक्त्रायै नमः
ओं दशभुजायै नमः
ओं शुद्धस्फटिकसन्निभायै नमः
ओं रक्तायै नमः
ओं कृष्णायै नमः
ओं सितायै नमः
ओं पीतायै नमः
ओं सर्ववर्णायै नमः
ओं निरीश्वर्यै नमः
ओं कालिकायै नमः
२००
ओं चक्रिकायै नमः
ओं देव्यै नमः
ओं सत्यायै नमः
ओं वटुकास्थितायै नमः
ओं तरुण्यै नमः
ओं वारुण्यै नमः
ओं नार्यै नमः
ओं ज्येष्ठादेव्यै नमः
ओं सुरेश्वर्यै नमः
ओं विश्वम्भराधरायै नमः
ओं कर्त्र्यै नमः
ओं गलार्गलविभञ्जन्यै नमः
ओं सन्ध्यारात्रिर्दिवाज्योत्स्नायै नमः
ओं कलाकाष्ठायै नमः
ओं निमेषिकायै नमः
ओं उर्व्यै नमः
ओं कात्यायन्यै नमः
ओं शुभ्रायै नमः
ओं संसारार्णवतारिण्यै नमः
ओं कपिलायै नमः
२२०
ओं कीलिकायै नमः
ओं अशोकायै नमः
ओं मल्लिकानवमल्लिकायै नमः
ओं देविकायै नमः
ओं नन्दिकायै नमः
ओं शान्तायै नमः
ओं भञ्जिकायै नमः
ओं भयभञ्जिकायै नमः
ओं कौशिक्यै नमः
ओं वैदिक्यै नमः
ओं देव्यै नमः
ओं सौर्यै नमः
ओं रूपाधिकायै नमः
ओं अतिभायै नमः
ओं दिग्वस्त्रायै नमः
ओं नववस्त्रायै नमः
ओं कन्यकायै नमः
ओं कमलोद्भवायै नमः
ओं श्रियै नमः
ओं सौम्यलक्षणायै नमः
२४०
ओं अतीतदुर्गायै नमः
ओं सूत्रप्रबोधिकायै नमः
ओं श्रद्धायै नमः
ओं मेधायै नमः
ओं कृतये नमः
ओं प्रज्ञायै नमः
ओं धारणायै नमः
ओं कान्त्यै नमः
ओं श्रुतये नमः
ओं स्मृतये नमः
ओं धृतये नमः
ओं धन्यायै नमः
ओं भूतये नमः
ओं इष्ट्यै नमः
ओं मनीषिण्यै नमः
ओं विरक्तये नमः
ओं व्यापिन्यै नमः
ओं मायायै नमः
ओं सर्वमायाप्रभञ्जन्यै नमः
ओं माहेन्द्र्यै नमः
२६०
ओं मन्त्रिण्यै नमः
ओं सिंह्यै नमः
ओं इन्द्रजालस्वरूपिण्यै नमः
ओं अवस्थात्रयनिर्मुक्तायै नमः
ओं गुणत्रयविवर्जितायै नमः
ओं ईषणत्रयनिर्मुक्तायै नमः
ओं सर्वरोगविवर्जितायै नमः
ओं योगिध्यानान्तगम्यायै नमः
ओं योगध्यानपरायणायै नमः
ओं त्रयीशिखायै नमः
ओं विशेषज्ञायै नमः
ओं वेदान्तज्ञानरुपिण्यै नमः
ओं भारत्यै नमः
ओं कमलायै नमः
ओं भाषायै नमः
ओं पद्मायै नमः
ओं पद्मवत्यै नमः
ओं कृतये नमः
ओं गौतम्यै नमः
ओं गोमत्यै नमः
२८०
ओं गौर्यै नमः
ओं ईशानायै नमः
ओं हंसवाहिन्यै नमः
ओं नारायण्यै नमः
ओं प्रभाधारायै नमः
ओं जाह्नव्यै नमः
ओं शङ्करात्मजायै नमः
ओं चित्रघण्टायै नमः
ओं सुनन्दायै नमः
ओं श्रियै नमः
ओं मानव्यै नमः
ओं मनुसम्भवायै नमः
ओं स्तम्भिन्यै नमः
ओं क्षोभिण्यै नमः
ओं मार्यै नमः
ओं भ्रामिण्यै नमः
ओं शत्रुमारिण्यै नमः
ओं मोहिन्यै नमः
ओं द्वेषिण्यै नमः
ओं वीरायै नमः
३००
ओं अघोरायै नमः
ओं रुद्ररूपिण्यै नमः
ओं रुद्रैकादशिन्यै नमः
ओं पुण्यायै नमः
ओं कल्याण्यै नमः
ओं लाभकारिण्यै नमः
ओं देवदुर्गायै नमः
ओं महादुर्गायै नमः
ओं स्वप्नदुर्गायै नमः
ओं अष्टभैरव्यै नमः
ओं सूर्यचन्द्राग्निरूपायै नमः
ओं ग्रहनक्षत्ररूपिण्यै नमः
ओं बिन्दुनादकलातीतायै नमः
ओं बिन्दुनादकलात्मिकायै नमः
ओं दशवायुजयाकारायै नमः
ओं कलाषोडशसम्युतायै नमः
ओं काश्यप्यै नमः
ओं कमलादेव्यै नमः
ओं नादचक्रनिवासिन्यै नमः
ओं मृडाधारायै नमः
३२०
ओं स्थिरायै नमः
ओं गुह्यायै नमः
ओं देविकायै नमः
ओं चक्ररूपिण्यै नमः
ओं अविद्यायै नमः
ओं शार्वर्यै नमः
ओं भुञ्जायै नमः
ओं जम्भासुरनिबर्हिण्यै नमः
ओं श्रीकायायै नमः
ओं श्रीकलायै नमः
ओं शुभ्रायै नमः
ओं कर्मनिर्मूलकारिण्यै नमः
ओं आदिलक्ष्म्यै नमः
ओं गुणाधारायै नमः
ओं पञ्चब्रह्मात्मिकायै नमः
ओं परायै नमः
ओं श्रुतये नमः
ओं ब्रह्ममुखावासायै नमः
ओं सर्वसम्पत्तिरूपिण्यै नमः
ओं मृतसञ्जीवन्यै नमः
३४०
ओं मैत्र्यै नमः
ओं कामिन्यै नमः
ओं कामवर्जितायै नमः
ओं निर्वाणमार्गदायै नमः
ओं देव्यै नमः
ओं हंसिन्यै नमः
ओं काशिकायै नमः
ओं क्षमायै नमः
ओं सपर्यायै नमः
ओं गुणिन्यै नमः
ओं भिन्नायै नमः
ओं निर्गुणायै नमः
ओं खण्डिताशुभायै नमः
ओं स्वामिन्यै नमः
ओं वेदिन्यै नमः
ओं शक्यायै नमः
ओं शाम्बर्यै नमः
ओं चक्रधारिण्यै नमः
ओं दण्डिन्यै नमः
ओं मुण्डिन्यै नमः
३६०
ओं व्याघ्र्यै नमः
ओं शिखिन्यै नमः
ओं सोमसंहतये नमः
ओं चिन्तामणये नमः
ओं चिदानन्दायै नमः
ओं पञ्चबाणप्रबोधिन्यै नमः
ओं बाणश्रेणये नमः
ओं सहस्राक्ष्यै नमः
ओं सहस्रभुजपादुकायै नमः
ओं सन्ध्याबलये नमः
ओं त्रिसन्ध्याख्यायै नमः
ओं ब्रह्माण्डमणिभूषणायै नमः
ओं वासव्यै नमः
ओं वारुणीसेनायै नमः
ओं कुलिकायै नमः
ओं मन्त्ररञ्जिन्यै नमः
ओं जितप्राणस्वरूपायै नमः
ओं कान्तायै नमः
ओं काम्यवरप्रदायै नमः
ओं मन्त्रब्राह्मणविद्यार्थायै नमः
३८०
ओं नादरुपायै नमः
ओं हविष्मत्यै नमः
ओं आथर्वणिः श्रुतयै नमः
ओं शून्यायै नमः
ओं कल्पनावर्जितायै नमः
ओं सत्यै नमः
ओं सत्ताजातये नमः
ओं प्रमायै नमः
ओं अमेयायै नमः
ओं अप्रमितये नमः
ओं प्राणदायै नमः
ओं गतये नमः
ओं अवर्णायै नमः
ओं पञ्चवर्णायै नमः
ओं सर्वदायै नमः
ओं भुवनेश्वर्यै नमः
ओं त्रैलोक्यमोहिन्यै नमः
ओं विद्यायै नमः
ओं सर्वभर्त्र्यै नमः
ओं क्षरायै नमः
४००
ओं अक्षरायै नमः
ओं हिरण्यवर्णायै नमः
ओं हरिण्यै नमः
ओं सर्वोपद्रवनाशिन्यै नमः
ओं कैवल्यपदवीरेखायै नमः
ओं सूर्यमण्डलसंस्थितायै नमः
ओं सोममण्डलमध्यस्थायै नमः
ओं वह्निमण्डलसंस्थितायै नमः
ओं वायुमण्डलमध्यस्थायै नमः
ओं व्योममण्डलसंस्थितायै नमः
ओं चक्रिकायै नमः
ओं चक्रमध्यस्थायै नमः
ओं चक्रमार्गप्रवर्तिन्यै नमः
ओं कोकिलाकुलचक्रेशायै नमः
ओं पक्षतये नमः
ओं पङ्क्तिपावनायै नमः
ओं सर्वसिद्धान्तमार्गस्थायै नमः
ओं षड्वर्णावरवर्जितायै नमः
ओं शतरुद्रहरायै नमः
ओं हन्त्र्यै नमः
४२०
ओं सर्वसंहारकारिण्यै नमः
ओं पुरुषायै नमः
ओं पौरुष्यै नमः
ओं तुष्टये नमः
ओं सर्वतन्त्रप्रसूतिकायै नमः
ओं अर्धनारीश्वर्यै नमः
ओं देव्यै नमः
ओं सर्वविद्याप्रदायिन्यै नमः
ओं भार्गव्यै नमः
ओं भूजुषीविद्यायै नमः
ओं सर्वोपनिषदास्थितायै नमः
ओं व्योमकेशायै नमः
ओं अखिलप्राणायै नमः
ओं पञ्चकोशविलक्षणायै नमः
ओं पञ्चकोशात्मिकायै नमः
ओं प्रतीचे नमः
ओं पञ्चब्रह्मात्मिकायै नमः
ओं शिवायै नमः
ओं जगज्जराजनित्र्यै नमः
ओं पञ्चकर्मप्रसूतिकायै नमः
४४०
ओं वाग्देव्यै नमः
ओं आभरणाकारायै नमः
ओं सर्वकाम्यस्थितास्थितये नमः
ओं अष्टादशचतुःषष्टिपीठिकाविद्यायुतायै नमः
ओं कालिकाकर्षणश्यामायै नमः
ओं यक्षिण्यै नमः
ओं किन्नरेश्वर्यै नमः
ओं केतक्यै नमः
ओं मल्लिकायै नमः
ओं अशोकायै नमः
ओं वाराह्यै नमः
ओं धरण्यै नमः
ओं ध्रुवायै नमः
ओं नारसिंह्यै नमः
ओं महोग्रास्यायै नमः
ओं भक्तानामार्तिनाशिन्यै नमः
ओं अन्तर्बलायै नमः
ओं स्थिरायै नमः
ओं लक्ष्म्यै नमः
ओं जरामरणनाशिन्यै नमः
४६०
ओं श्रीरञ्जितायै नमः
ओं महाकायायै नमः
ओं सोमसूर्याग्निलोचनायै नमः
ओं अदितये नमः
ओं देवमात्रे नमः
ओं अष्टपुत्रायै नमः
ओं अष्टयोगिन्यै नमः
ओं अष्टप्रकृतये नमः
ओं अष्टाष्टविभ्राजद्विकृताकृतये नमः
ओं दुर्भिक्षध्वंसिन्यै नमः
ओं सीतायै नमः
ओं सत्यायै नमः
ओं रुक्मिण्यै नमः
ओं ख्यातिजायै नमः
ओं भार्गव्यै नमः
ओं देवयोनये नमः
ओं तपस्विन्यै नमः
ओं शाकम्भर्यै नमः
ओं महाशोणायै नमः
ओं गरुडोपरिसंस्थितायै नमः
४८०
ओं सिंहगायै नमः
ओं व्याघ्रगायै नमः
ओं वायुगायै नमः
ओं महाद्रिगायै नमः
ओं अकारादिक्षकारान्तायै नमः
ओं सर्वविद्याधिदेवतायै नमः
ओं मन्त्रव्याख्याननिपुणायै नमः
ओं ज्योतिशास्त्रैकलोचनायै नमः
ओं इडापिङ्गलिकामध्यसुषुम्नायै नमः
ओं ग्रन्थिभेदिन्यै नमः
ओं कालचक्राश्रयोपेतायै नमः
ओं कालचक्रस्वरूपिण्यै नमः
ओं वैशारद्यै नमः
ओं मतिश्रेष्ठायै नमः
ओं वरिष्ठायै नमः
ओं सर्वदीपिकायै नमः
ओं वैनायक्यै नमः
ओं वरारोहायै नमः
ओं श्रोणिवेलायै नमः
ओं बहिर्वलये नमः
५००
ओं जम्भिन्यै नमः
ओं जृम्भिण्यै नमः
ओं जम्भकारिण्यै नमः
ओं गणकारिकायै नमः
ओं शरण्यै नमः
ओं चक्रिकायै नमः
ओं अनन्तायै नमः
ओं सर्वव्याधिचिकित्सक्यै नमः
ओं देवक्यै नमः
ओं देवसङ्काशायै नमः
ओं वारिधये नमः
ओं करुणाकरायै नमः
ओं शर्वर्यै नमः
ओं सर्वसम्पन्नायै नमः
ओं सर्वपापप्रभञ्जन्यै नमः
ओं एकमात्रायै नमः
ओं द्विमात्रायै नमः
ओं त्रिमात्रायै नमः
ओं अपरायै नमः
ओं अर्धमात्रायै नमः
५२०
ओं परायै नमः
ओं सूक्ष्मायै नमः
ओं सूक्ष्मार्थार्थपरायै नमः
ओं एकवीरायै नमः
ओं विशेषाख्यायै नमः
ओं षष्ठीदेव्यै नमः
ओं मनस्विन्यै नमः
ओं नैष्कर्म्यायै नमः
ओं निष्कलालोकायै नमः
ओं ज्ञानकर्माधिकायै नमः
ओं गुणायै नमः
ओं सबन्ध्वानन्दसन्दोहायै नमः
ओं व्योमाकारायै नमः
ओं अनिरूपितायै नमः
ओं गद्यपद्यात्मिकायै नमः
ओं वाण्यै नमः
ओं सर्वालङ्कारसम्युतायै नमः
ओं साधुबन्धपदन्यासायै नमः
ओं सर्वौकसे नमः
ओं घटिकावलये नमः
५४०
ओं षट्कर्मिण्यै नमः
ओं कर्कशाकारायै नमः
ओं सर्वकर्मविवर्जितायै नमः
ओं आदित्यवर्णायै नमः
ओं अपर्णायै नमः
ओं कामिन्यै नमः
ओं वररूपिण्यै नमः
ओं ब्रह्माण्यै नमः
ओं ब्रह्मसन्तानायै नमः
ओं वेदवागीश्वर्यै नमः
ओं शिवायै नमः
ओं पुराणन्यायमीमांसाधर्मशास्त्रागमश्रुतायै नमः
ओं सद्योवेदवत्यै नमः
ओं सर्वायै नमः
ओं हंस्यै नमः
ओं विद्याधिदेवतायै नमः
ओं विश्वेश्वर्यै नमः
ओं जगद्धात्र्यै नमः
ओं विश्वनिर्माणकारिण्यै नमः
ओं वैदिक्यै नमः
५६०
ओं वेदरूपायै नमः
ओं कालिकायै नमः
ओं कालरूपिण्यै नमः
ओं नारायण्यै नमः
ओं महादेव्यै नमः
ओं सर्वतत्त्वप्रवर्तिन्यै नमः
ओं हिरण्यवर्णरूपायै नमः
ओं हिरण्यपदसम्भवायै नमः
ओं कैवल्यपदव्यै नमः
ओं पुण्यायै नमः
ओं कैवल्यज्ञानलक्षितायै नमः
ओं ब्रह्मसम्पत्तिरूपायै नमः
ओं ब्रह्मसम्पत्तिकारिण्यै नमः
ओं वारुण्यै नमः
ओं वारुणाराध्यायै नमः
ओं सर्वकर्मप्रवर्तिन्यै नमः
ओं एकाक्षरपरायै नमः
ओं अयुक्तायै नमः
ओं सर्वदारिद्र्यभञ्जिन्यै नमः
ओं पाशाङ्कुशान्वितायै नमः
५८०
ओं दिव्यायै नमः
ओं वीणाव्याख्याक्षसूत्रभृते नमः
ओं एकमूर्त्यै नमः
ओं त्रयीमूर्त्यै नमः
ओं मधुकैटभभञ्जन्यै नमः
ओं साङ्ख्यायै नमः
ओं साङ्ख्यवत्यै नमः
ओं ज्वालायै नमः
ओं ज्वलन्त्यै नमः
ओं कामरूपिण्यै नमः
ओं जाग्रत्यै नमः
ओं सर्वसम्पत्तये नमः
ओं सुषुप्तायै नमः
ओं स्वेष्टदायिन्यै नमः
ओं कपालिन्यै नमः
ओं महादम्ष्ट्रायै नमः
ओं भ्रुकुटीकुटिलाननायै नमः
ओं सर्वावासायै नमः
ओं सुवासायै नमः
ओं बृहत्यै नमः
६००
ओं अष्टये नमः
ओं शक्वर्यै नमः
ओं छन्दोगणप्रतिष्ठायै नमः
ओं कल्माष्यै नमः
ओं करुणात्मिकायै नमः
ओं चक्षुष्मत्यै नमः
ओं महाघोषायै नमः
ओं खड्गचर्मधरायै नमः
ओं अशनये नमः
ओं शिल्पवैचित्र्यविद्योतायै नमः
ओं सर्वतोभद्रवासिन्यै नमः
ओं अचिन्त्यलक्षणाकारायै नमः
ओं सूत्रभाष्यनिबन्धनायै नमः
ओं सर्ववेदार्थसम्पत्तये नमः
ओं सर्वशास्त्रार्थमातृकायै नमः
ओं अकारादिक्षकारान्तसर्ववर्णकृतस्थलायै नमः
ओं सर्वलक्ष्म्यै नमः
ओं सदानन्दायै नमः
ओं सारविद्यायै नमः
ओं सदाशिवायै नमः
६२०
ओं सर्वज्ञायै नमः
ओं सर्वशक्त्यै नमः
ओं खेचरीरूपगायै नमः
ओं उच्छ्रितायै नमः
ओं अणिमादिगुणोपेतायै नमः
ओं पराकाष्ठायै नमः
ओं परागतये नमः
ओं हंसयुक्तविमानस्थायै नमः
ओं हंसारूढायै नमः
ओं शशिप्रभायै नमः
ओं भवान्यै नमः
ओं वासनाशक्त्यै नमः
ओं आकृतिस्थाखिलायै नमः
ओं अखिलायै नमः
ओं तन्त्रहेतवे नमः
ओं विचित्राङ्ग्यै नमः
ओं व्योमगङ्गाविनोदिन्यै नमः
ओं वर्षायै नमः
ओं वार्षिकायै नमः
ओं ऋग्यजुस्सामरूपिण्यै नमः
६४०
ओं महानद्यै नमः
ओं नदीपुण्यायै नमः
ओं अगण्यपुण्यगुणक्रियायै नमः
ओं समाधिगतलभ्यार्थायै नमः
ओं श्रोतव्यायै नमः
ओं स्वप्रियायै नमः
ओं घृणायै नमः
ओं नामाक्षरपरायै नमः
ओं उपसर्गनखाञ्चितायै नमः
ओं निपातोरुद्वयीजङ्घायै नमः
ओं मातृकायै नमः
ओं मन्त्ररूपिण्यै नमः
ओं आसीनायै नमः
ओं शयानायै नमः
ओं तिष्ठन्त्यै नमः
ओं धावनाधिकायै नमः
ओं लक्ष्यलक्षणयोगाढ्यायै नमः
ओं ताद्रूप्यगणनाकृतयै नमः
ओं एकरूपायै नमः
ओं नैकरूपायै नमः
६६०
ओं तस्यै नमः
ओं इन्दुरूपायै नमः
ओं तदाकृतये नमः
ओं समासतद्धिताकारायै नमः
ओं विभक्तिवचनात्मिकायै नमः
ओं स्वाहाकारायै नमः
ओं स्वधाकारायै नमः
ओं श्रीपत्यर्धाङ्गनन्दिन्यै नमः
ओं गम्भीरायै नमः
ओं गहनायै नमः
ओं गुह्यायै नमः
ओं योनिलिङ्गार्धधारिण्यै नमः
ओं शेषवासुकिसंसेव्यायै नमः
ओं चपलायै नमः
ओं वरवर्णिन्यै नमः
ओं कारुण्याकारसम्पत्तये नमः
ओं कीलकृते नमः
ओं मन्त्रकीलिकायै नमः
ओं शक्तिबीजात्मिकायै नमः
ओं सर्वमन्त्रेष्टायै नमः
६८०
ओं अक्षयकामनायै नमः
ओं आग्नेय्यै नमः
ओं पार्थिवायै नमः
ओं आप्यायै नमः
ओं वायव्यायै नमः
ओं व्योमकेतनायै नमः
ओं सत्यज्ञानात्मिकायै नमः
ओं ब्राह्म्यै नमः
ओं ब्रह्मणे नमः
ओं सनातन्यै नमः
ओं अविद्यावासनायै नमः
ओं मायाप्रकृतये नमः
ओं सर्वमोहिन्यै नमः
ओं शक्तये नमः
ओं धारणशक्तये नमः
ओं चिदचिच्छक्तियोगिन्यै नमः
ओं वक्त्रारुणायै नमः
ओं महामायायै नमः
ओं मरीचये नमः
ओं मदमर्दिन्यै नमः
७००
ओं विराजे नमः
ओं स्वाहायै नमः
ओं स्वधायै नमः
ओं शुद्धायै नमः
ओं निरुपास्तये नमः
ओं सुभक्तिगायै नमः
ओं निरूपिताद्वयीविद्यायै नमः
ओं नित्यानित्यस्वरूपिण्यै नमः
ओं वैराजमार्गसञ्चारायै नमः
ओं सर्वसत्पथदर्शिन्यै नमः
ओं जालन्धर्यै नमः
ओं मृडान्यै नमः
ओं भवान्यै नमः
ओं भवभञ्जन्यै नमः
ओं त्रैकालिकज्ञानतन्तवे नमः
ओं त्रिकालज्ञानदायिन्यै नमः
ओं नादातीतायै नमः
ओं स्मृतये नमः
ओं प्रज्ञायै नमः
ओं धात्रीरूपायै नमः
७२०
ओं त्रिपुष्करायै नमः
ओं पराजितायै नमः
ओं विधानज्ञायै नमः
ओं विशेषितगुणात्मिकायै नमः
ओं हिरण्यकेशिन्यै नमः
ओं हेमब्रह्मसूत्रविचक्षणायै नमः
ओं असङ्ख्येयपरार्धान्तस्वरव्यञ्जनवैखर्यै नमः
ओं मधुजिह्वायै नमः
ओं मधुमत्यै नमः
ओं मधुमासोदयायै नमः
ओं मधवे नमः
ओं माधव्यै नमः
ओं महाभागायै नमः
ओं मेघगम्भीरनिस्वनायै नमः
ओं ब्रह्मविष्णुमहेशादिज्ञातव्यार्थविशेषगायै नमः
ओं नाभौवह्निशिखाकारायै नमः
ओं ललाटेचन्द्रसन्निभायै नमः
ओं भ्रूमध्येभास्कराकारायै नमः
ओं हृदिसर्वताराकृतये नमः
ओं कृत्तिकादिभरण्यन्त नक्षत्रेष्ट्यार्चितोदयायै नमः
७४०
ओं ग्रहविद्यात्मिकायै नमः
ओं ज्योतिषे नमः
ओं ज्योतिर्विदे नमः
ओं मतिजीविकायै नमः
ओं ब्रह्माण्डगर्भिण्यै नमः
ओं बालायै नमः
ओं सप्तावरणदेवतायै नमः
ओं वैराजोत्तमसाम्राज्यायै नमः
ओं कुमारकुशलोदयायै नमः
ओं बगलायै नमः
ओं भ्रमराम्बायै नमः
ओं शिवदूत्यै नमः
ओं शिवात्मिकायै नमः
ओं मेरुविन्ध्यातिसंस्थानायै नमः
ओं काश्मीरपुरवासिन्यै नमः
ओं योगनिद्रायै नमः
ओं महानिद्रायै नमः
ओं विनिद्रायै नमः
ओं राक्षसाश्रितायै नमः
ओं सुवर्णदायै नमः
७६०
ओं महागङ्गायै नमः
ओं पञ्चाख्यायै नमः
ओं पञ्चसंहतये नमः
ओं सुप्रजातायै नमः
ओं सुवीरायै नमः
ओं सुपोषायै नमः
ओं सुपतये नमः
ओं शिवायै नमः
ओं सुगृहायै नमः
ओं रक्तबीजान्तायै नमः
ओं हतकन्दर्पजीविकायै नमः
ओं समुद्रव्योममध्यस्थायै नमः
ओं समबिन्दुसमाश्रयायै नमः
ओं सौभाग्यरसजीवातवे नमः
ओं सारासारविवेकदृशे नमः
ओं त्रिवल्यादिसुपुष्टाङ्गायै नमः
ओं भारत्यै नमः
ओं भरताश्रितायै नमः
ओं नादब्रह्ममयीविद्यायै नमः
ओं ज्ञानब्रह्ममयीपरायै नमः
७८०
ओं ब्रह्मनाड्यै नमः
ओं निरुक्तये नमः
ओं ब्रह्मकैवल्यसाधनायै नमः
ओं कालिकेयमहोदारवीर्यविक्रमरूपिण्यै नमः
ओं वडवाग्निशिखावक्त्रायै नमः
ओं महाकवलतर्पणायै नमः
ओं महाभूतायै नमः
ओं महादर्पायै नमः
ओं महासारायै नमः
ओं महाक्रतवे नमः
ओं पञ्चभूतमहाग्रासायै नमः
ओं पञ्चभूताधिदेवतायै नमः
ओं सर्वप्रमाणायै नमः
ओं सम्पत्तये नमः
ओं सर्वरोगप्रतिक्रियायै नमः
ओं ब्रह्माण्डान्तर्बहिर्व्याप्तायै नमः
ओं विष्णुवक्षोविभूषिण्यै नमः
ओं शाङ्कर्यै नमः
ओं निधिवक्त्रस्थायै नमः
ओं प्रवरायै नमः
८००
ओं वरहेतुक्यै नमः
ओं हेममालायै नमः
ओं शिखामालायै नमः
ओं त्रिशिखायै नमः
ओं पञ्चलोचनायै नमः
ओं सर्वागमसदाचारमर्यादायै नमः
ओं यातुभञ्जन्यै नमः
ओं पुण्यश्लोकप्रबन्धाढ्यायै नमः
ओं सर्वान्तर्यामिरूपिण्यै नमः
ओं सामगानसमाराध्यायै नमः
ओं श्रोत्रकर्णरसायनायै नमः
ओं जीवलोकैकजीवातवे नमः
ओं भद्रोदारविलोकनायै नमः
ओं तडित्कोटिलसत्कान्त्यै नमः
ओं तरुण्यै नमः
ओं हरिसुन्दर्यै नमः
ओं मीननेत्रायै नमः
ओं इन्द्राक्ष्यै नमः
ओं विशालाक्ष्यै नमः
ओं सुमङ्गलायै नमः
८२०
ओं सर्वमङ्गलसम्पन्नायै नमः
ओं साक्षान्मङ्गलदेवतायै नमः
ओं देहहृद्दीपिकायै नमः
ओं दीप्तये नमः
ओं जिह्वपापप्रणाशिन्यै नमः
ओं अर्धचन्द्रोल्लसद्दम्ष्ट्रायै नमः
ओं यज्ञवाटीविलासिन्यै नमः
ओं महादुर्गायै नमः
ओं महोत्साहायै नमः
ओं महादेवबलोदयायै नमः
ओं डाकिनीड्यायै नमः
ओं शाकिनीड्यायै नमः
ओं साकिनीड्यायै नमः
ओं समस्तजुषे नमः
ओं निरङ्कुशायै नमः
ओं नाकिवन्द्यायै नमः
ओं षडाधाराधिदेवतायै नमः
ओं भुवनज्ञाननिःश्रेणये नमः
ओं भुवनाकारवल्लर्यै नमः
ओं शाश्वत्यै नमः
८४०
ओं शाश्वताकारायै नमः
ओं लोकानुग्रहकारिण्यै नमः
ओं सारस्यै नमः
ओं मानस्यै नमः
ओं हंस्यै नमः
ओं हंसलोकप्रदायिन्यै नमः
ओं चिन्मुद्रालङ्कृतकरायै नमः
ओं कोटिसूर्यसमप्रभायै नमः
ओं सुखप्राणिशिरोरेखायै नमः
ओं सददृष्टप्रदायिन्यै नमः
ओं सर्वसाङ्कर्यदोषघ्न्यै नमः
ओं ग्रहोपद्रवनाशिन्यै नमः
ओं क्षुद्रजन्तुभयघ्न्यै नमः
ओं विषरोगादिभञ्जन्यै नमः
ओं सदाशान्तायै नमः
ओं सदाशुद्धायै नमः
ओं गृहच्छिद्रनिवारिण्यै नमः
ओं कलिदोषप्रशमन्यै नमः
ओं कोलाहलपुरस्थितायै नमः
ओं गौर्यै नमः
८६०
ओं लाक्षणिक्यै नमः
ओं मुख्यायै नमः
ओं जघन्याकृतिवर्जितायै नमः
ओं मायायै नमः
ओं विद्यायै नमः
ओं मूलभूतायै नमः
ओं वासव्यै नमः
ओं विष्णुचेतनायै नमः
ओं वादिन्यै नमः
ओं वसुरूपायै नमः
ओं वसुरत्नपरिच्छदायै नमः
ओं छान्दस्यै नमः
ओं चन्द्रहृदयायै नमः
ओं मन्त्रस्वच्छन्दभैरव्यै नमः
ओं वनमालायै नमः
ओं वैजयन्त्यै नमः
ओं पञ्चदिव्यायुधात्मिकायै नमः
ओं पीताम्बरमय्यै नमः
ओं चञ्चत्कौस्तुभायै नमः
ओं हरिकामिन्यै नमः
८८०
ओं नित्यायै नमः
ओं तथ्यायै नमः
ओं रमायै नमः
ओं रामायै नमः
ओं रमण्यै नमः
ओं मृत्युभञ्जन्यै नमः
ओं ज्येष्ठायै नमः
ओं काष्ठायै नमः
ओं धनिष्ठान्तायै नमः
ओं शराङ्ग्यै नमः
ओं निर्गुणप्रियायै नमः
ओं मैत्रेयायै नमः
ओं मित्रविन्दायै नमः
ओं शेष्यशेषकलाशयायै नमः
ओं वाराणसीवासरतायै नमः
ओं आर्यावर्तजनस्तुतायै नमः
ओं जगदुत्पत्तिसंस्थानसंहारत्रयकारणायै नमः
ओं तुभ्यं नमः
ओं अम्बायै नमः
ओं विष्णुसर्वस्वायै नमः
९००
ओं महेश्वर्यै नमः
ओं सर्वलोकानां जनन्यै नमः
ओं पुण्यमूर्तये नमः
ओं सिद्धलक्ष्म्यै नमः
ओं महाकाल्यै नमः
ओं महालक्ष्म्यै नमः
ओं सद्योजातादिपञ्चाग्निरूपायै नमः
ओं पञ्चकपञ्चकायै नमः
ओं यन्त्रलक्ष्म्यै नमः
ओं भवत्यै नमः
ओं आदये नमः
ओं आद्याद्यायै नमः
ओं सृष्ट्यादिकारणाकारविततये नमः
ओं दोषवर्जितायै नमः
ओं जगल्लक्ष्म्यै नमः
ओं जगन्मात्रे नमः
ओं विष्णुपत्न्यै नमः
ओं नवकोटिमहाशक्तिसमुपास्यपदाम्बुजायै नमः
ओं कनत्सौवर्णरत्नाढ्यसर्वाभरणभूषितायै नमः
९२०
ओं अनन्तानित्यमहिष्यै नमः
ओं प्रपञ्चेश्वरनायक्यै नमः
ओं अत्युच्छ्रितपदान्तस्थायै नमः
ओं परमव्योमनायक्यै नमः
ओं नाकपृष्ठगताराध्यायै नमः
ओं विष्णुलोकविलासिन्यै नमः
ओं वैकुण्ठराजमहिष्यै नमः
ओं श्रीरङ्गनगराश्रितायै नमः
ओं रङ्गनायक्यै नमः
ओं भूपुत्र्यै नमः
ओं कृष्णायै नमः
ओं वरदवल्लभायै नमः
ओं कोटिब्रह्मादिसंसेव्यायै नमः
ओं कोटिरुद्रादिकीर्तितायै नमः
ओं मातुलुङ्गमयं खेटं बिभ्रत्यै नमः
ओं सौवर्णचषकं बिभ्रत्यै नमः
ओं पद्मद्वयं दधानायै नमः
ओं पूर्णकुम्भं बिभ्रत्यै नमः
ओं कीरं दधानायै नमः
ओं वरदाभये दधानायै नमः
ओं पाशं बिभ्रत्यै नमः
९४०
ओं अङ्कुशं बिभ्रत्यै नमः
ओं शङ्खं वहन्त्यै नमः
ओं चक्रं वहन्त्यै नमः
ओं शूलं वहन्त्यै नमः
ओं कृपाणिकां वहन्त्यै नमः
ओं धनुर्बाणौ बिभ्रत्यै नमः
ओं अक्षमालां दधानायै नमः
ओं चिन्मुद्रां बिभ्रत्यै नमः
ओं अष्टादशभुजायै नमः
ओं लक्ष्म्यै नमः
ओं महाष्टादशपीठगायै नमः
ओं भूमिनीलादिसंसेव्यायै नमः
ओं स्वामिचित्तानुवर्तिन्यै नमः
ओं पद्मायै नमः
ओं पद्मालयायै नमः
ओं पद्मिन्यै नमः
ओं पूर्णकुम्भाभिषेचितायै नमः
ओं इन्दिरायै नमः
ओं इन्दिराभाक्ष्यै नमः
ओं क्षीरसागरकन्यकायै नमः
९६०
ओं भार्गव्यै नमः
ओं स्वतन्त्रेच्छायै नमः
ओं वशीकृतजगत्पतये नमः
ओं मङ्गलानांमङ्गलाय नमः
ओं देवतानान्देवतायै नमः
ओं उत्तमानामुत्तमायै नमः
ओं श्रेयसे नमः
ओं परमामृतायै नमः
ओं धनधान्याभिवृद्धये नमः
ओं सार्वभौमसुखोच्छ्रयायै नमः
ओं आन्दोलिकादिसौभाग्यायै नमः
ओं मत्तेभादिमहोदयायै नमः
ओं पुत्रपौत्राभिवृद्धये नमः
ओं विद्याभोगबलादिकायै नमः
ओं आयुरारोग्यसम्पत्तये नमः
ओं अष्टैश्वर्यायै नमः
ओं परमेशविभूतये नमः
ओं सूक्ष्मात्सूक्ष्मतरागतये नमः
ओं सदयापाङ्गसन्दत्तब्रह्मेन्द्रादिपदस्थितये नमः
ओं अव्याहतमहाभाग्यायै नमः
९८०
ओं अक्षोभ्यविक्रमायै नमः
ओं वेदानाम्समन्वयायै नमः
ओं वेदानामविरोधायै नमः
ओं निःश्रेयसपदप्राप्तिसाधनायै नमः
ओं निःश्रेयसपदप्राप्तिफलायै नमः
ओं श्रीमन्त्रराजराज्ञ्यै नमः
ओं श्रीविद्यायै नमः
ओं क्षेमकारिण्यै नमः
ओं श्रीं बीज जपसन्तुष्टायै नमः
ओं ऐं ह्रीं श्रीं बीजपालिकायै नमः
ओं प्रपत्तिमार्गसुलभायै नमः
ओं विष्णुप्रथमकिङ्कर्यै नमः
ओं क्लीङ्कारार्थसावित्र्यै नमः
ओं सौमङ्गल्याधिदेवतायै नमः
ओं श्रीषोडशाक्षरीविद्यायै नमः
ओं श्रीयन्त्रपुरवासिन्यै नमः
ओं सर्वमङ्गलमाङ्गल्यायै नमः
ओं शिवायै नमः
ओं सर्वार्थसाधिकायै नमः
ओं शरण्यायै नमः
१०००
ओं त्र्यम्बकायै नमः
ओं गौर्यै नमः
ओं नारायण्यै नमः
इति श्री लक्ष्मी सहस्रनाम पूर्ण ||
Significance of Laxmi Sahasranamam
Mahalaxmi is the auspicious sign, good luck, good fortune, prosperity, success, and happiness. She is the active energy of Vishnu. Her four hands signify her power to grant the four Purusharthas (ends of human life), Dharma (righteousness), Artha (wealth), Kama (pleasures of the flesh), and Moksha (beatitude). Laxmi Sahasranamam ends poverty. All problems are overcome by worshiping Goddess Lakshmi, the Goddess of wealth. Not only this, but Lord Shri Vishnu is also pleased by her worship. Devotees get the blessings of Lord Vishnu along with the blessings of Goddess Lakshmi.Benefits of Laxmi Sahasranamam
- For good luck, good fortune and success.- For stability to wealth.
- To increase income and repay debt money.
- For the attainment of marital happiness and good health.
- To solve economic problems and the trade deficit.
- For divine blessings of Goddess Laxmi and her 8 forms.
- For wealth, fortune and prosperity.
- For success and removal of obstacles.
- For a happy family life.
- To achieve good health and longevity.
- Lack of wealth from life goes away forever.
- Happiness in the family and respect is increased in society.
- For vehicle happiness.
- The childless couple blesses with a child.
- For grain, food, and nourishment.
Spiritual Benefits of Laxmi Sahasranamam
- Grant Moksha / Mukti Or Salvation.- Give liberation and devotional service.
- For removal of planetary doshas in horoscope.
- It destroys sins & past karma by Antahkarna Shuddhi.
- It is the most powerful ritual for dhyaan/ meditation and spiritual attainments.
- Promotes spiritual growth.
Health Benefits of Laxmi Sahasranamam
- One should perform this ritual for good health and prosperity.- Boosts immunity & bestows longevity.
- Bestows longevity and excellent fitness.
- Protects from ailments & improves health.
- Worshippers get relief from diseases, difficulties and dangers.
- Prevents mental & physical diseases.
- For freedom from diseases.
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